sojat ka praacheen itihaas

राजस्थान सौंदर्य का सोजत शहर

sojat ka praacheen itihaas

मेहंदी नगरी, सोजत राजस्थान सौंदर्य का सोजत शहर

जय दोस्तों आज हम बताएंगे सोजत के बारे में सोजत का प्राचीन इतिहास की सोजत का किला सोजत के दुर्ग

सोजत की अद्भुत कला सोजत की विश्व प्रसिद्ध मेहंदी

 

 

सोजत राष्ट्रीय राजमार्ग 64 पर स्थित हैं

सोजत मेहंदी के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं
सोजत पाली से 35 किलोमीटर दूर

 राजस्थान राज्य के पाली जिले का एक कस्बा है इसी नाम से एक तहसील भी हैं 

Fort of sojat Sojat ka kila

सोजत का प्राचीन इतिहास दुर्ग किला Tourism
सोजत की अद्भुत कला।
आइए आज हम ले चलते हैं आपको मेहंदी नगरी विश्व प्रसिद्ध सोजत मैं
एक किस्सा किले का : आमेर और मेहरानगढ़ से भी पुराना हैं सोजत का किला यह किला रामेलाव तालाब के पास स्थित है किले में कई छोटे छोटे दुर्ग बने हुये हैं सोजत का सैकड़ों साल पुराना इतिहास और उस समय का रहन सहन किले के दो विसाल द्वार हैं दुर्ग में होती है गैर आजकल सोजत दुर्ग में होली के पर्व पर गैर करते हैं। यहां मेला भी भरता है।

मेहंदी ने दिलाई ख्याति
सोजत प्राचीन ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी तो है ही, साथ ही धार्मिक आस्था के लिए भी जाना जाता है। यहां की मेहंदी के कारण सोजत अन्तराष्ट्रीय मानचित्र पर भी छाया है।

बड़ा रोमांचक सफर है नगरी का
सोजत की ये धरा देवताओं की क्रीड़ा स्थली के साथ ही ऋषि मुनियों की तपो भूमि है। शास्त्रों में शुद्धदेती के नाम से प्रसिद्ध इस नगरी के नाम का सफर बड़ा रोमांचक है ।

sojat ka praacheen itihaas

ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी सोजत को हिना शहर (मेहंदी नगरी) भी कहा जाता है, सोजत शहर की उत्पत्ति और उत्पादित भारत की सबसे बड़ी मेहंदी मंडी है। इस क्षेत्र में



उत्पादित मेहंदी को दुनिया भर में “राजस्थानी हिना” के रूप में लोकप्रियता मिली है। यह हाथों और पैरों पर अमीर अंधेरे लाल रंग का दाग प्रदान करता है और बाल

SOJAT KA KILA

के लिए एक अच्छा प्राकृतिक कंडीशनर के रूप में भी कार्य करता है।

मानचित्र पर प्रसिद्धि दिलवाई है।

यह भूमि देवताओं की क्रीड़ा स्थली एवं ऋषि मुनियों की तपो

भूमि प्राचीन सभ्यताओ की समकालीन रही है। शास्त्रों में शुद्धदेती के नाम से प्रसिद्ध

इस नगरी के नाम का सफर भी बड़ा ही रोमांचक एवं रोचक रहा है।

आबू और अजमेर के बीच किराड़ू लोद्रवा के पुंगल राज के दौरान पंवारों का यहां पर




करने का निर्देश दिया। एक दिन सेजल के रात्रि में बाहर

निकलने पर बांधर उसके पीछे पीछे भाखरी तक गया तब

जोगनियों ने कहा आज तो तूं अकेली नहीं आई

है। तब सेजल ने नीचे जाकर देखा तो उसे सेनापति नजर आया।

सेजल ने कुपीत होकर उसे शाप देना चाहा तब वह उसके चरणों में गिर

गया तथा बताया कि

वह तो उनके पिताजी के आदेश से आया है। इस पर उसने बांधर को

आशीर्वाद दिया तथा अपने पिता को शाप दिया। बालिका ने बांधर से कहा कि आज से

साथ उड़ गई। राजा को जब यह बात पता चली तो दुखी होकर उसने

अपने प्राण त्याग दिए। इसी बांधर हुल ने सेजल माता का मंदिर एवं भाखरी के नीचे

चबूतरा तथा पावता जाव के पीछे बाघेलाव तालाब खुदवाया।

इसके बाद सोजत पर कई वर्षों तक हुलों का राज रहा जिसमें

हरिसिंह हुल हरिया हुल नाम से प्रसिद्ध राजा हुआ।

के रूप में दिया। सोनगरा राजा रावल कानड़ दे का राज भी

सोजत पर रहा, राणा ने राव रिडमल को मंडोर के साथ सोजत दिया।

राणाकुंभा ने राव राघोदास को
पट्टे में दिया। राजा पृथ्वीराज चौहान, नाहड राव पंवार मधो लहर की वेढ़ के बाद सोलंकी राजा भींवदे, फिर सिंघलों का राज रहा। बाद में राव सुजा को बादशाह ने
यह नगरी दी। वहीं राव वीरम देव को भाई बन्ट में प्राप्त हुई। संन 1588 में रावगंगा के अधिकार में रहा उसके बाद उसके पुत्र राव मालदेव तथा उसके बाद
को 1 वर्ष के लिए दिया गया। 1664 में जहागीर ने इसे करम सेन उग्र से नोत को दिया। महाराजा विजय सिंह के समय सोजत में कई निर्माण कार्य हुए।
बात सोजत रा परंगना री में मुहंता नैणसी लिखता है कि छोटी सी भाकरी उपर छोटा सा कोट है जिसमें सादे मकान है। राजा गजसिंह के समय एक घर नया
बना यहां वीरम दे बाधावत देवस्वरूप हुआ। जिसका दिवला बना हुआ है। घोड़े बधने की पायगा बनी हुई है घर के बाहर दरबार बैठने का चबुतरा है। किले के ए श्री चामुंडा माता के मंदिर पर हर वर्ष 2 विशाल मेला लगता हे जो की नागपंचमी एवं उबछट को आयोजित होता हैं साथ ही हर नवरात्रा में विशाल भजन संध्या



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